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bornwanderer चढ़ती थीं उस मज़ार पर चादरें बेशुमार , लेकिन बाहर बैठा कोई फ़क़ीर सर्दी से मर गया।। 3w

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bornwanderer रफ़्तार कुछ इस कदर तेज है जिंदगी की,
की सुबह का दर्द शाम को पुराना हो जाता है।
1mon

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bornwanderer गुज़र गया दिन अपनी तमाम रौनके लेकर,,,
ज़िन्दगी ने वफ़ा कि तो कल फिर
सिलसिले होंगे
2mon

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bornwanderer तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा...
तु बदल गया है...
खो गया होता तो और बात होती..
3mon

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